हिंदू राष्ट्र की चर्चा और जुम्मे का अवकाश ! - Bharat Samvad

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Thursday, December 1, 2022

हिंदू राष्ट्र की चर्चा और जुम्मे का अवकाश !

क्या एसबीआई की नियत खराब है या फिर मुस्लिम इलाकों में केंद्र सरकार ने शुक्रवार की साप्ताहिक छुट्टी की अनुमति दी है ?

 हिंदूवादी संगठनों में आक्रोश 

रमाकांत पांडेय 

नवी मुंबई-: देश और राज्य में "हिंदूवादी" सरकार होने का दावा करने वाली भाजपा सरकार में इस्लामीकरण की जैसे मुहिम शुरू हो गई है। देश की सबसे बड़ी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया(एसबीआई) भी मुस्लिमों के तुष्टीकरण में जुट गई है, या फिर यह कहें कि बैंक की नियत खराब हो गई है जो सर्कुलर जारी कर हिंदू राष्ट्र में जुम्मे का अवकाश देने का निर्णय लिया है। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में शुक्रवार को साप्ताहिक छुट्टी देने का निर्णय एक दिसंबर से लागू किए जाने के विरोध में हिंदूवादी संगठनों ने बिगुल बजा दिया है। हालांकि जनाक्रोश को देखते हुए एसबीआई बैकफुट पर आ गई है। ज्ञात हो कि ‘स्टेट बैंक ऑफ इंडिया’ की तरफ से मुंबई के दादर एवं गोवंडी-मानखुर्द की शाखाओं के अलावा कुछ अन्य मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों की शाखाओं को एक दिसंबर 2022 से रविवार की जगह प्रत्येक शुक्रवार को छुट्टी देने का निर्णय लिया गया था। परंतु बैंक के इस निर्णय के खिलाफ हिन्दू जनजागृति समिति के साथ विभिन्न हिन्दू संगठनों द्वारा इसका घोर विरोध शुरू किया गया तथा इस संदर्भ में हिन्दू जनजागृति समिति की तरफ से एसबीआई की गोवंडी शाखा, दादर शाखा एवं नरिमन पॉईंट की मुख्य शाखा में निवेदन देकर इस तरह से इस्लामीकरण के निर्णय को रद्द करने की मांग करते हुए विरोध प्रकट किया था । हिंदू संघटनों के विरोध को देखते हुए बुधवार शाम को एसबीआई के आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से इस निर्णय को स्थगित करने की घोषणा कर दी गई। हिंदू जनजागृति समिति के प्रवक्ता रमेश शिंदे ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र में किसी एक समुदाय का तुष्टीकरण करने के प्रयास को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में अगर इस तरह तुष्टीकरण करने की हिमाकत की गई तो हम उसका विरोध प्रदर्शन करने से पीछे नहीं हटेंगे। हिंदू जनजागृति समिति के राज्य संघटक सुनील घनवट के मुताबिक एसबीआई के इस निर्णय की वजह से सामान्य नागरिकों में बैंक के द्वारा मुसलमानों के लिए यह फैसला लिए जाने से नाराजगी है। शासन के द्वारा नियंत्रित बैंकों में किसी विशिष्ट धर्म के लिए अनुकूल निर्णय लेना अन्य धर्मों के साथ अन्याय करने जैसा ही है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि बैंक द्वारा शुक्रवार को छुट्टी घोषित करने के निर्णय से ऐसा मन मे सवाल उठता है जैसे हम पाकिस्तान में रह रहे हैं या फिर हिन्दुस्थान में ? समिति की तरफ से भी बैंक से यह सवाल पूंछा गया था कि ‘स्टेट बैंक ऑफ इंडिया’ की कुछ शाखाओं के द्वारा इस तरह से छुट्टी के दिनों में परिवर्तन लाने का आखिर कारण क्या है ? समिति द्वारा इस निर्णय को वापस नहीं लिए जाने पर जन-आंदोलन करने की चेतावनी दी थी। यह दिगर बात है कि बैंक ने अपने इस निर्णय को वापस ले लिया है, परंतु केंद्र सरकार को इस तरह की निंदनीय फैसला लेने वालों की व्यापक जांच कर कठोर कारवाई करने की मांग की जा रही है ।

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